दिल से दिल को आज मिलायें,रंगों की रंगोली में !
आओ शिकवे गिले मिटायें,प्रीत वढ़ायें होली में !!
एक साल में एक बार यह, पर्व सलोना आता है !
फ़ाग फुहारों के पड़ने से, जुड़ता दिल से नाता है !
संगी साथी को बैठायें ,अरमानों की डोली में !!......
आओ शिकवे गिले मिटायें.......
आओ शिकवे गिले मिटायें.......
पड़े हुऐ हैं अलग थलग जो,रिश्तों में दरार आई !
उनको टीका कर गुलाल का, भर दो अब गहरी खाई !
आओ फिर संबंध बनायें, बिछड़े दामन चोली में !!......
आओ शिकवे गिले........
आओ शिकवे गिले........
नहीं सांच को आंच,होलिका जली दर्प की ज्वाला में !
शक्ति असीमित भरी हुई है,प्रभु नाम की माला में !
प्यार भरा आशीष निहित है, अक्षत चंदन रोली में !!......
आओ शिकवे गिले ......
आओ शिकवे गिले ......
दिल से दिल को आज मिलायें, रंगों की रंगोली में !
आओ शिकवे गिले मिटायें, प्रीत वढ़ायें होली में !!
प्यारे दोस्तों आप सभी को परिवार सहित
प्यारे दोस्तों आप सभी को परिवार सहित
रंगों के इस पावन पर्व की बहुत-बहुत शुभकामनाऐ..... शुभ
संध्या.........
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